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Saturday, November 1, 2008

दस्तरखान !

अंगूर को किशमिश ।
किशमिश को जाम ।
वक़्त बदलता है ।
बदलती हैं फितरत ।
नियत ने गुलाटी मारी ।

इस वक्त के दस्तरखान पर ।
देखें आज क्या परोसा है ।

1 comment:

nony said...

kaafee gehraee hai is angoor aur kishmish mein ........ dastakwan acha saja hai